Wednesday, 29 August 2012

फैसला आपके हाथ, क्या आपको डरपोक रहना है, अथवा ..... ? "



फैसला आपके हाथ, क्या आपको डरपोक रहना है 


अथवा ..... ? "


........... चंद्रकांत वाजपेयी. जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता.



देश के सम्मानीय नागरिकों, हमारे बच्चों के शिक्षा का हक तुड़वाया था  अजमल कसाब के

आतंकवादी हमलों के डरनें, परन्तु यह हक पुन: बहाल करवाया था राष्ट्रनिष्ठ युवा संगठन ' अखिल

भारतीय विद्यार्थी परिषद् नें ।" 

यदि अ.भा.वि.प. ना होता तो कसाब के विरुद्ध कोर्ट में ग्वाही देनेंवाली शूरवीर बालिका 'देविका 

रोटवान' शिक्षा से वंचित रह जाती। ख़ुशी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट, विद्यार्थी परिषद् और बहादुर 

देविका; सबनें अपना - अपना धर्म निभाया है। क्या आप भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध सड़क पर उतरकर 

अपना धर्म निभायेंगे ?


क्या आप ऐसे बहादुर बालिका और देशभक्त अ.भा.वि.प. की तरह निर्भीकता से कार्य करते हुवे 


भारत की समृद्धि और संरक्षण करनेंवाले " यूथ -अगेस्ट करप्शन,  " अण्णा हजारे प्रणित 

''भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन न्यास, '' इंडिया अगेंस्ट करप्शन, " विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

समावेशित भ्रष्टाचारमुक्त भारत निर्माण आन्दोलन, " भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं बाबा रामदेव के

कालाधन वापस लाओ आन्दोलन आदि का सच्चा साथ नहीं देंगे? क्या आप डरपोक रहकर देश को

भ्रष्टाचार की दीमक लगानें वाले चंद राजनीतिज्ञों का साथ देंगे ? उन्हें वोट देंगे या वोट ना देकर

चोट पहुंचाएंगे ? फैसला आपके हाथ, सोचिये आपको क्या करना है ।


......  चंद्रकांत वाजपेयी, जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता.      

    chandrakantvjp@gmail.com   +919730500506      

Friday, 17 August 2012

क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता ...

 क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता ...
 १६/०८/२०१२.         क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता के लिये अभिनन्दन'  अथवा    'संभावित कुटिलचाल के लिए निर्वासन...

क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता के लिये अभिनन्दन' अथवा 'संभावित कुटिलचाल के लिए निर्वासन'

१६/०८/२०१२.       क्या किया जाना उचित होगा ?

'विश्वस्तर पर धनाढ्यता के लिये अभिनन्दन'
 अथवा 
  'संभावित कुटिलचाल के लिए निर्वासन' 

" हर बेटे की माँ उसकी सच्ची 'रक्षक' और सच्ची 'गुरु' होती है। जब कोई माँ अपनें बेटे को यह सीख दे कि मेरे प्रिय पुत्र "साहस-शौर्य और सुबुद्धि द्वारा राष्ट्रनिर्माण ही तेरा जीवन है, मै मेरा ऐसा बेटा चाहती हूँ जो केवल देश के लिए जिये, तब उस घर में निश्चित ही राष्ट्र निर्माता तैयार होते है."  जीजा माता के इसी व्यवहार के कारण शिवाजी एक शूरवीर इतिहास पुरुष बने. अर्थात पुत्र/पुत्री का भविष्य मां गढ़ती है |
उपरोक्त तथ्य की सत्यता के लिए आज भी विश्व के एक परिवार का जिवंत उदाहरण सबके सामने है। यह वह परिवार है जिसके कुछ पीढ़ीयों से वंशज सत्ता के शीर्ष में रहे है। इस परिवार की एक माता को विश्वस्तरीय धनाढ्यों में माना जा चुका है और इस परिवार का नाम भारत के इतिहास में भी अंकित है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आँख बंद करके और बिना कोई विशेष विचार किये अनेकानेक नागरिक इस परिवार का सही नाम बता देंगे |
मेरा मानना है कि उल्लेखित परिवार की कुछ बहु-बेटियाँ प्रारम्भ में उल्लेखित बातों को अच्छी तरह से समझ चुकी है और उसका पालन करके अपनें निजी उद्देश्य प्राप्ति में सफल रही है। संभवत: उन्होंने सानंद यह स्वीकार कर लिया है कि "वे उनके वंशजों की 'सच्ची रक्षक' और 'सच्ची गुरु' है अत: उन्हें केवल ऐसे पुत्र - पुत्री उनके देश के सामनें प्रस्तुत करना है जिनके हाथों से सदा सत्ता सूत्र संचालित होते रहें या सत्ता उनके हाथों में बनी रहे। साथ ही साथ उन्होंने निजी रूपसे उनका उद्देश्य यह भी मान लिया है कि उनके वंशज स्थायी अनंत संपत्ति के मालिक बनें | इस हेतु वे इसका पालन कुछ विशिष्ट पद्धतिसे
करती रही है।
इस परिवार की कुछ माताए शायद अपनें पुत्र-पुत्री को प्रतिदिन यह शिक्षा देती रही है कि " भविष्य में तू और केवल तू ही तेरे अपनें देश का कर्णधार है। सत्ता सूत्र सदैव अपनें हाथों में रख। तू साम-दाम-दंड-भेद का उपयोग करके संपत्ति का अनगिनत अर्जन कर, निजीतौर पर केवल यही तेरे जीवन का और हमारे परिवार का मूललक्ष है। इस स्थिति की प्राप्ति पर ही तू मेरा पुत्र या पुत्री कहलायेगा अन्यथा नहीं। बोल वचन दे की तू मेरा सच्चा और आज्ञाकारी पुत्र या पुत्री बनना चाहता है या नहीं ? बताया गया लक्ष प्राप्त करना चाहता है या नहीं ? यह याद रख कि " तेरे पूर्वज इसी क्रम में आगे बढे है, क्या तू अपनें पूर्वजों के कदमों पर कदम नहीं रखेगा ? आप ही बताइये कौन अपनी मां को ना करेगा ? उसे तो हाँ कहना ही होगा, उसे लक्ष प्राप्ति का वचन देना ही होगा।    " क्या प्रतिदिन अपनी मां को ऐसा वचन देते हुवे उस व्यक्ति के खून में उक्त भाव व्यवहार में लानें का संकल्प, न समा जाएगा ? "
लक्ष प्राप्त करनें की पक्की सोच बनानें के लिए शायद इस परिवार की कुछ माताएं उनके पुत्र - पुत्रियों को आगे यह भी समझाती होंगी कि " जिस देश में तू रहता है उस देश में तेरे चारों तरफदिखनें वाले, तेरे साथ खेलनें वाले, तेरे साथ पढ़नें वाले या तुझे मदत करनें वाले सभी लोग तेरे सेवक है, इनको कभी अपना भाई या सच्चा मित्र ना समझना और ना कभी ऐसा नाता जोड़ना। तेरे इस देश के लोग बहुत ज्यादा भावुक होनें के साथ - साथ लोभी है, धन या पद के लोभी। इन्हें कुछ थोडे से रुपयों में अथवा कोई छोटा लाभ देकर आराम से खरीदा या बेचा जा सकता है। इनको आपस में लड़वाना भी बहुत सरल है। इसलिए इन्हें कभी आपस में इकट्ठा नहीं होने देना है और इनमें विचारों की साम्यता भी नहीं होनें देना है। इन्हें हमेशा आपस में लड़वाओं और अपना उल्लू सीधा करते हुवे ऊपर बताया गया अपना लक्ष प्राप्त करो। हमेशा यही रणनीति उपयोग में लाना है और कामयाब होना है।
इस देश के लोग मीठे बोल से पिघल जाते है। अत: सबसे पहले मीठा बोलकर उनके साथ दिखावे के लिए दो कदम चलना। ऐसा स्वांग करनें में सफल होना कि तेरे व्यवहार से उन्हें सच्चा लगनें लगे कि केवल उनके कष्ट दूर करनें के लिए तू अपना घरबार-परिवार  छोड़कर उनके पास आया है। कच्चे मकान में एकाद रात रहना और उनके भोजन का आनंद लेनें का स्वांग करनें में सफल होना। तब निश्चित ही वे भावुक होकर तेरे आगे चार कदम चलेंगे, वे तेरी गुलामी करते रहेंगे और इतना ही नहीं वे इमानदारी के साथ तेरे लिए अपनी जान भी जोखिम में डालेंगे।
बस इतना याद रख " तू हर हालत में इस देश के मूल निवासियों को कड़वे बोल नहीं बोलेगा। ऐसा दिखा कि तू उनके लिए नि:स्वार्थ काम कर रहा है, उपकार कर रहा है। " फिर क्या वे सब तुझ पर कुर्बान हो जायेंगे। तेरे कहने पर आँख मूंदकर अपराध करेंगे, धन की लूटपाट अनैतिकता और बाहुबल के मार्ग से करेंगे। इतना ही नहीं वे जेल भी जायेंगे पर तुझे नोट - वोट और सत्ता सब कुछ स्वयं लाकर देंगे। 
यह कहावत सच है कि हर दिन इतवार नहीं होता और लक्ष्मी चंचल होती है ।  इसी तरह इंसान का मन भी स्थिर नहीं होता, वह कभी भी बदल सकता है ।   इसलिए अभी तक प्राप्त नोट - वोट और सत्ता की स्थिति स्थायी भाव नहीं है । या यूँ कहें की तेरे मूललक्ष प्राप्ति का यह अंतिम चरण नहीं है । अंतिम चरण पर पहुँचने के लिए प्राप्त संपत्ति को सुरक्षित रखना होगा और लगातार  पैसे से पैसा बनाना होगा ।  अतएव यथाआवश्यकता धन को विदेशों में गुप्त रूप से भेजना और उसी धन को फिर से तेरे निवास वाले देश की उन्नति के नाम पर कर्ज के रूप में वापस लाना होगा।  मतलब तुम्हारा स्वयंका और तुम्हारे सहयोगियों का अघोषित सारा पैसा ,जिसे "कालाधन " कहते है,  जो तुमनें सहयोगियोके साथ गुप्त रूप से विदेश में  रखा हो , उसी पैसे को ब्याज के आधार पर व्यापार के नाम से  फिर उसी देश में लाना, जिस देश में तुम रहते हो और स्थायी रूप से अनगिनत [अनंत] वैधानिक संपत्ति अर्जित करना ।  
अब आप ही सोचिये और हमें बताइये, 
हम सब देशवासी क्या करे ?
  विश्वस्तर पर धनाढ्यता की कीर्ती हेतू , 
क्या हम सब करे उनका हार्दिक अभिनंदन ?
अथवा 
नई पीढी को कुटिलचाल की गलत सीख हेतू , 
क्यो ना करे उनका पदस्थान से निर्वासन ?
________________________________
  ' अब चाहिये जवाब आपका' और 'कर्तव्य देशावासियो का' ।        ________________________________

Friday, 20 July 2012

Recommendations for Economic Transparency in India: " क्या जन-प्रतिनिधि तभी बनेंगे जब वे यह कर दिखाएँग...

Recommendations for Economic Transparency in India: " क्या जन-प्रतिनिधि तभी बनेंगे जब वे यह कर दिखाएँग...: 20/07/2012.  WHY THE 25th JULY & 9th AUGUST 2012 ,  ARE MOST IMPORTANT DAYS TO ALL THE LEADERS  OF INDIA ? "क्या जन-प्रतिनिधि अब तभ...

" क्या जन-प्रतिनिधि तभी बनेंगे जब वे यह कर दिखाएँगे ? "



20/07/2012. 


WHY THE 25th JULY & 9th AUGUST 2012 , ARE MOST


IMPORTANT DAYS TO ALL THE LEADERS OF INDIA ?




"क्या जन-प्रतिनिधि अब तभी बनेंगे जब वे यह कर 
दिखाएँगे?" 




       नेताओं,  याद  रखिये  कि  यदि  " जन लोकपाल  विधेयक  को 


आपका  पूर्ण  समर्थन  नहीं मिलेगा,  अण्णा हजारे के भ्रष्टाचार  विरोधी 


आन्दोलन  /  २५ जुलाई २०१२ को  केंद्र के १५ दागी मंत्रियो व १६२ 


भ्रष्ट-दागी  सांसदों  के  विरुद्ध  जंतर-मंतर  या  आपके  निवास  के 


निकटस्थ  स्थानीय  केंद्र  पर  इस  बाबद  आयोजित  आमरण  भूख 


हड़ताल में आपकी सहभागिता नहीं रहेगी, और बाबा रामदेवजी के ९ 


अगस्त २०१२  के  आन्दोलन  में  आपकी  अनुपस्थिति  या  दूरी पायी 


जायेगी तो फिर  आप  निश्चित  ही  नेता या जन -प्रतिनिधि बननें के 


लायक नहीं है।


जब आप उक्त सब कर दिखाएँगे तभी सब  कहेंगे की आप नेता है और


उम्मीदवारी की प्राथमिक परीक्षा में सफल हुवे है । आप हमारे भी 


नेता है, बशर्ते आप उम्मीदवारी की उपरोक्त प्राथमिक परीक्षा में 


सफल होते है, देश के कानून का उल्लंघन नहीं करते, आपके विरुद्ध 


कोई अपराधिक मुकदमा / ऍफ़आयआर दर्ज नहीं है और भविष्य में 


भी यही स्थिति बनाकर रखेंगे, आप सभी सार्वजनिक हित के कार्यों 


में खुले दिल से सहकार्य करते हैं, आप स्नातक तक पढाई कर चुके 


है, आपकी आयु ६०वर्ष से ज्यादा नही है, आप किसी धर्म, जाती, 


भाषा या प्रांत के प्रति विशेष आसक्त न होकर समभाव रखते है. 


इतना ही नहीं आपअपने स्वयं के और खून के रिश्ते दारो के आर्थिक 


आय-व्यय को हर चार माह में वेब साईट पर सार्वजनिक करनें तथा 


कोई आर्थिक, भावनिक अथवा शारीरिक अपराध घटित नहीं होनें 


देनें के लिए वैधानिक तरीके से वचन बद्ध है तो, आगामी चुनाव में 


आप हमारे उम्मीदवार ही नहीं जन प्रतिनिधि होंगे. 


देश को आपकी ही जरूरत है. इसलिए २५ जुलाई और ९ अगस्त


२०१२ को अपनें प्राणों की बाजी लगाएं - देश के लिए जियें । 




क्या आप देश के लिए जियेंगे ? क्या उपरोक्त कर दिखाएँगे ? 

" आपकी जय हो. जय हिंद. जय भारत. "




राष्ट्रहितार्थ प्रतिबद्ध , 




चंद्रकांत वाजपेयी.  { जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता. } 




Coordinator : 




 " Movement for Corruptionfree India thru


 Science & Technology" Aurangabad. Maharashtra. 




Mobile  No.  :   +919730500506. 


Email: chandrakantvjp@gmail.com

Wednesday, 18 July 2012

" काँच की बरनी और दो कप चाय "


A very good story please read.  comment......please.

काँच की बरनी और दो कप चाय  [ एक बोध कथा ]

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती है । 

दर्शनशास्त्र के एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि 
वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ... 

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी़ बरनी ( जार ) टेबल पर 

रखा और उसमें टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते

रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ... 

उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ आवाज आई  

फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये । 

धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह

खाली थी , समा गये , फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब 

बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा अब प्रोफ़ेसर 

साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु 

किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र 

अपनी नादानी पर हँसे ... फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो 

यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ .. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने 

एक स्वर में कहा .. सर ने टेबल के नीचे से चाय के दो कप 

निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित 

थोडी़ सी जगह में सोख ली गई ... 

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया – 


1. इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो .... 

2. टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान, परिवार,  
    बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं ।

3. छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी, कार, बडा़ मकान आदि हैं। 
    
4. रेत का मतलब  छोटी-छोटी बेकार सी बातें, मनमुटाव, झगडे़ आदी। 

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ... 
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ... यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय नहीं रहेगा ... मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ , घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ... टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ..... पहले तय करो कि क्या जरूरी है ... बाकी सब तो रेत है .. 
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे .. अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया कि " चाय के दो कप " क्या हैं ? प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ... 

इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे, लेकिन हमारे पास उस परम पिता परमात्मा को सिमरन करने के लिए हमेशा समय होना चाहिए.।।

Sunday, 15 July 2012

औरंगाबाद महानगरपालिकेच्या सुरक्षितते साठी " ई-कैश बुकचा उपयोग " करण्याची मागणी.

औरंगाबाद.  दिनांक.   २९ जून,२०१२.
विज्ञान आणि प्रौद्योगिकी समावेशित
भ्रष्टाचारमुक्त भारत निर्माण आंदोलन.
[ गैर राजनीतिक व गैर व्यापारिक ज्ञान-विज्ञान विकास समूह ]
( समुहाचे पंजीयन प्रतीक्षित )
{ संयोजक : चंद्रकांत वाजपेयी. जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता }
मोबा. क्रमांक : +९१ ९७३०५००५०६.  ई-मेल : chandrakantvjp@gmail.com   एल १/५, कासलीवाल विश्व, उल्कानगरी, पार्वतीनगर, गारखेडा, औरंगाबाद. ४३१००५. 

पत्र क्र.:विप्रौस भ्रमुनिआ / औबाद / 01 / ०००१                              दिनांक : २९ - ०६ - २०१२.   
प्रतिष्ठेत,     
मा.  श्रीमती अनिता घोडेले. ( महापौर ) मो.+९१९४२३१४८८४५  व  +९१९४२२७०७५५० .   महानगरपालिका, औरंगाबाद  ( महाराष्ट्र )    

मान्यवर श्री विकास जैन [सभापती]  +९१९३७२८९९९९९.
 महानगरपालिका, औरंगाबाद  ( महाराष्ट्र )                                                                                             
डॉ. पुरुषोत्तम भापकर साहेब, ( आयुक्त )
आयुक्त कार्यालय,  महानगरपालिका.
          औरंगाबाद  ( महाराष्ट्र )                   
                                     - - - :विषय:---
    औरंगाबाद महानगरपालिकेच्या सुरक्षितते साठी " ई-कैश बुकचा उपयोग " करण्याची मागणी.  

संदर्भ: महानगरपालिका औरंगाबादचे कैशबुक हरविले असून शोध चालू असणे आणि त्या साठी पोलीस फिर्याद करणे विषयक बातम्यांची वर्तमान पत्रातून प्रसिद्धी 
दि.२९ जून २०१२.                                                                                                                            
(१)"महापालिकेचे कैशबुक गायब" शीर्षकांतर्गत प्रसिद्ध बातमी."दिव्य मराठी" दिव्यसिटी औ.बाद. पान-३
  (२)"लेखा विभागातील कैशबुकचा शोध सुरु."शीर्षकांतर्गत प्रसिद्ध बातमी"महाराष्ट्रटाइम्स"  औ.बाद. पान-२.
 (३) गेल्या वर्षी केंद्र शासन आणि टीम अण्णा (लोकपाल बिल संयुक्त मसौदा समिती) यांना "ई- मेल केलेले  "आणि  दिव्य मराठीस प्रसिद्धी साठी प्रेषित केलेले विनंती पत्र दिनांक  १९/०६/ २०११.   यथावश्यकता या पत्राची लिंक खाली नमूद केली आहे.
पत्रात सर्व शासकीय व गैरशासकीय प्रतिष्ठानास  ई-कैशबुक अनिवार्यत:  संचालित करणे विषयक निवेदन केले आहे.

मान्यवर,
              वरील संदर्भातून औरंगाबाद महानगरपालिकेची कैशबुक हरविल्याची / पळविली गेल्याची  दु:खद बातमी वाचण्यात आली.  वाईट वाटले.   
कांही वर्षापासून हे अनुभवास येते कि  " देशभरात विभिन्न सरकारी आणि गैरसरकारी प्रतिष्ठानातून  नागरिकांच्या पैशाचा अपव्यय किंवा त्यांच्या धनाची
लबाडी करण्याचे धोरण ज्याला "भ्रष्टाचार" म्हटले जाते सर्रास चालू आहे. इतकेच नव्हे तर या  प्रतिष्ठानातील  भ्रष्टाचाराचे लेखी कागदी पुरावे नष्ट करणे किंवा पळविणे देखील कांही भ्रष्ट तत्व करताहेत.   देश रक्षणार्थ या कृतींना पूर्ण पणे बंदी घालणे अतिशय आवश्यक व गरजेचे झाले असल्यानेच वरील संदर्भ क्रमांक तीन (३) मध्ये उल्लेख केल्या प्रमाणे  " ई-कैशबुक " संचालन करणे  तसेच त्या पत्रातील अन्य व्यवस्थांचे स्थापन देशभरात करणे विषयक निवेदन अधो-उल्लेखित प्रेषकाने  शासनाला, तसेच अनेक मान्यवरांना आणि माध्यमाना या पूर्वी केले आहे.
                           मान्यवर महापौर सा., सभापती साहेब आणि माननीय आयुक्त साहेबांना आज विनम्र मागणी करीत आहे कि कृपाकरून "औरंगाबाद महानगर पालिकेत ताबडतोब  " ई-कॅशबुक संचालन करणे आणि दररोजचे प्रत्येक आर्थिक व्यवहाराचे अभिलेख विशिष्ट लेखावेबसाईटवर अपलोड करण्याचे व सार्वजनिक करण्याचे बंधनकारी धोरण  व्यवहारात आणण्याची सुरक्षित व्यवस्था करावी, अन्यथा शांतीपूर्ण अहिंसात्मक पद्धतीनेच वरील व्यवस्था स्थापित  करविण्याचे विधीमान्य प्रयोग करण्यास आम्ही बाध्य राहू ज्याची संपूर्ण जवाबदारी औरंगाबाद  महानगरपालिकेची राहील. " 
आपण त्रि-महानुभावांना पुन: एकदा वरील व्यवस्थांची अंमल बजावणी करावी अशी विनम्र विनंती करतो. विश्वास करतो कि आपल्या द्वारे वरील माध्यमातून नागरिकांच्या धनाची योग्य सुरक्षा आणि केवळ विकासकार्यात व नगरपालिकेच्या अत्यावश्यक सेवा पूर्तीसाठी नियमांतर्गत स्वीकृत खर्च पूर्णत: प्रामाणिकपणे करणे घडविले जाईल आणि असे इमानदार कर्तव्य निर्वाहनाचे चित्र सातत्याने औरंगाबादच्या नागरिकांना आढळेल, या साठी मी चंद्रकांत वाजपेयी आपला सदैव आभारी राहीन. आपले कडून वरील विषयावर ई-मेल द्वारे लवकरात लवकर माहिती मिळेल हे अपेक्षित आहे.  धन्यवाद.
शुभकांमनासह,
राष्ट्रहितार्थ प्रतिबद्ध,

चंद्रकांत वाजपेयी. [ जेष्ठ नागरिक आणि सामाजिक कार्यकर्ता ]
संयोजक '' विज्ञान आणि प्रौद्योगिकी समावेशित भ्रष्टाचारमुक्त भारत निर्माण आंदोलन. औरंगाबाद.
[ गैर राजनीतिक व गैर व्यापारिक ज्ञान-विज्ञान विकास समूह] ( समुहाचे पंजीयन प्रतीक्षित )
वरील कृतीच्या स्थापनेत सहयोग आणि मार्गदर्शनार्थ निवेदन प्रतिलिपी :--
१.आदरणीय अण्णा हजारे साहेब, 
 महाराष्ट्र राज्य कार्यालय  अण्णा हजारे प्रणीत                                             भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन न्यास, राळेगणसिद्धी   
तालुका: पारनेर, जिल्हा: अहमदनगर.{ महा.}             

२.जिल्हा अध्यक्ष श्री रामाराव बोर्डे साहेब 
   सचिव श्री एकनाथ जायभाये सा. आणि कार्यकर्ते,     
  जिल्हा समिती अण्णा हजारे प्रणीत  भ्रष्टाचार विरोधी 
   जन-आंदोलन न्यास, औरंगाबाद [ महाराष्ट्र ]

३.  अध्यक्ष / सचिव एवं कार्यकर्ते. IAC
     इंडिया अगेन्स्ट करप्शन.  औरंगाबाद [ महाराष्ट्र ]

४ सर्व भ्रष्टाचार विरोधी संगठन, औरंगाबाद.                              
       { युथ अगेन्स्ट करप्शन. (YAC) स्वाभिमान भारत ट्रस्ट/ पतंजली योग समिती आणि श्री श्री रविशंकर महाराज कृत आर्ट ऑफ लिविंगचे कार्यकर्ते }
विश्वास आहे की आपले सर्वांचे / संगठनांचे स्नेह, सहयोग आणि  मार्गदर्शन मिळेल ज्या योगे तरुणांना तकनिकी कार्य व रोजगार वृद्धी करता येईल. तसेच नागरिकांच्या पैशाचे मोल  भ्रष्टाचारमुक्त सेवेतून अनुभवले जाईल. 
 पुन: धन्यवाद व शुभेच्छासह,

 चंद्रकांत वाजपेयी.  +९१९७३०५००५०६.
chandrakantvjp@gmail.com