Sunday, 3 February 2013

आरोपो - प्रत्यारोपो से देश में उपज रही अशांती को रोकने हेतू प्रस्तुत सुझावो पर अंमल करने के लिये केंद्रीय गृहराज्य मंत्री को निवेदन -पत्र.


from: Chandrakant Vajpeyi <chandrakantvjp@gmail.com>
to: rpn.singh@nic.in
date: Mon, Feb 4, 2013 at 1:59 AM
subject: आरोपो - प्रत्यारोपो से देश में उपज रहे अशांती पूर्ण वातावरण को स्थायी रोकने के उपायो हेतू --
 सुझावात्मक निवेदन पत्र ।
mailed-by: gmail.com

दिनांक ०४ फरवरी २०१३.
प्रेषक :-- चंद्रकांत वाजपेयी. { जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता } 
            एल १ / ५, कासलीवाल विश्व, उल्कानगरी, गारखेडा, औरंगाबाद. 
                         औरंगाबाद  ( महाराष्ट्र ) पिन :-- 431001.   
       ई -मेल :-- chandrakantvjp@gmail.com +91 9730500506 begin_of_the_skype_highlighting            +91 9730500506      end_of_the_skype_highlighting .

प्रतिष्ठा में, 
आदरणीय आर. पी. एन. सिंह साहब,  
                  { केंद्रीय गृह राज्यमंत्री }
          कमरा क्रमांक १२७,  गृह राज्य मंत्री कार्यालय  
                       भारत शासन,  दिल्ली.  
ई - मेल आईडी:--    rpn.singh@nic.in
(011) 24632653, 24649194 Fax. (011) 24649195.

विषय :-- आरोपो - प्रत्यारोपो से देश में उपज रहे अशांती पूर्ण वातावरण को 
                     स्थायी रोकने के उपायो हेतू सुझावात्मक निवेदन पत्र ।

संदर्भ :-- दिनांक ०३ / ०२ / २०१३ को " आज तक टिव्ही चैनल " के 'सीधी बात' कार्यक्रम में एंकर 
             श्री राहुल कंवर साहाब के सामने आपके द्वारा देशहित में अभिव्यक्त चिंता / वक्तव्य।


माननीय मंत्री महोदय,
                                           देशोन्नती एवं राष्ट्रसुरक्षा कार्यार्थ
                                       " हा र्दि क शु भ का म ना यें "

          दिनांक ०३ / ०२ / २०१३ को रात्रि ०८:३० से ०९:०० बजे के मध्य "आज तक टिव्ही चैनल" के 
'सीधी बात' कार्यक्रम में आपनें एंकर श्री राहुल कंवर साहाब से स्पष्ट रूप से कहा है कि :
" भारत में   आज   किसी भी व्यक्ति पर,   कभी भी,   किसी भी प्रकार   का झूठा 
( या सच्चा )  आरोप  लगाना  बहुत  सरल  हो  गया  है  । "

माननीय मंत्री जी,  गृह मंत्रालय का दायित्व होनें के बावजूद आपनें बिना लाग लपेट के सच्चाई 
प्रस्तुत की है वह तारीफे काबिल है , इसके लिए मै आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन करता हूँ।

मेरी समझ के अनुसार,  माननीय मंत्री जी द्वारा इस कथन के पीछे 
यह मकसद होना चाहिए कि :--
" देश में आजकल सरकारी कार्यालयों की व्यवस्था और नेता ओं/अधिकारियों - कर्मचारियों के 
बयानों के आधार पर राजनीतिक कारणों से अथवा स्वार्थी आर्थिक हितों के कारण बहुत ही 
सहजता के साथ झूठे (या सच्चे) इल्जाम लगाए जा रहे है । इन आरोपों और प्रत्यारोपोंसे देशभर में 
परस्पर वर्मनस्य - शत्रुता का भाव और अशांति का फैलाव बढ़ता जा रहा है ,जिसका रोका जाना 
देश की परम आवश्यकता है।"

माननीय मंत्री जी, मै एक जेष्ठ नागरिक हूँ ।  देशहित का विचार करना व उसके परिपालन में प्रामाणिक प्रयास करना 
अपना राष्ट्रीय धर्म-कर्तव्य मानता हूँ । उपरोक्त राष्ट्रीय धर्म-कर्तव्य का पालन करते हुवे यहाँ पर आपका ध्यानाकर्षण 
करना चाहता हूँ कि 
" अनुभवों और सामान्य सर्वे के अनुसार आरोपों-प्रत्यारोपों के प्रमुख क्षेत्र "आर्थिक व्यवस्था"
पद्धती  और  "दोषपूर्ण कार्यालयीन कार्य पद्धति" पाए गये है ।  इन दोनों ही क्षेत्रों में पारदर्शिता के 
अभाव के कारण संदेह उत्पन्न होते है, जो परस्पर आरोप - प्रत्यारोपों के कारक होते है ।''

माननीय मंत्री महोदय, यह हर्ष और समाधान का विषय है की उल्लेखित समस्या का निदान देश में 
उपलब्ध है। बिना किसी विशेष परिश्रम लिए उक्त समस्या को न्यूनतम स्तर या शुन्यता की ओर ले 
जाया जा सकता है। इसके लिए " केवल आपके स्वयं के, क़ानून मंत्री जी के और माननीय प्रधान 
मंत्री जी के ' मन की दृढ़ता ' और ' राष्ट्रहित की व्यवहारिक सोच - प्रस्तुति करना ' ही आवश्यक है। "

---: समस्या निदान का व्यावहारिक सूत्र :---

देशमें लागू आरटीआय क़ानून कलम ४ का समग्र पूर्ण सख्ती से पालन हो.


केवल एक अध्यादेश निकाला जाए कि :--


"तत्काल प्रभाव से केंद्र और राज्य सरकार के प्रयेक सरकारी 

कार्यालय तथा प्रत्येक निजी उद्योग - प्रतिष्ठान को हर दिन के " आय 

- व्यय " ब्यौरे के प्रतिदिन लेखांकित पृष्ठ की सत्यापित प्रतिलिपि 

को { दैनिक रोकड़ बही में की गयी प्रविष्टियों के सत्यापित पृष्ठ कि 

प्रतिलिपि को } और उक्त कार्यालय के हर स्तर के प्रत्येक आदेश को 

दुसरे दिन प्रात: ११:०० बजे  सार्वजनिक सूचना पटल पर चस्पाना 

और आगामी ७ दिनों के अन्दर उपरोक्त चस्पाये गए सत्यापित 

कागजादो की हुबहू - नकलों को वेबसाईट पर अपलोड करना 

कार्यालय प्रमुख तथा निदेशक के लिए अनिवार्य व बंधनकारी होगा। 

इस आदेश की अवहेलना अंतर्गत कुछ नियत वर्षों कि कठोर सजा का 

प्रावधान होगा ।
 
( कृपया सजा की अवधि का निर्धारण न्याय विभाग से करवाकर अध्यादेश में उद्घृत किया जावे।)


यह स्मरण रहे कि 


" आरटीआय क़ानून कलम ४ के अनुसार यह प्रावधान है की सरकारी 
कार्यालयों को ' उस प्रत्येक कार्यालय के आतंरिक व्यवस्थाओं की 
सम्पूर्ण जानकारी गोपनीय नहीं रखते हुवे और नागरिकों के द्वारा 
बिना मांग किये हुवे स्वयं होकर सार्वजनिक करना है ।"

दुर्भाग्य से इस नियम [ आरटीआय क़ानून कलम ४ ] का पालन नहीं होनें के कारण देश में 
पारदर्शिता का अभाव अनुभव में आता है जो विभिन्न प्रकार के संदेह निर्माण कर देश में आरोप - 
प्रत्यारोप,  अशांति व अराजकता को जन्म देता है।

माननीय मंत्री जी, मेरा पूर्ण विश्वास है कि आप चिंता पूर्वक उपरोक्त उल्लेखित अध्यादेश का 
प्रसारण और उसका सख्ती से परिपालन करवाकर भारत में शान्ति, सुरक्षा, समृद्धि और विकास के 
मार्ग को प्रशस्त करेंगे, जिसके लिए मै आपका सदैव आभारी रहूंगा।

हार्दिक शुभकामनाओं सहित,

राष्ट्रहितार्थ प्रतिबद्ध,

-- विनम्र निवेदक --


........ चंद्रकांत वाजपेयी. 
{ जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता } 

ई -मेल :-- chandrakantvjp@gmail.com +91 9730500506 begin_of_the_skype_highlighting            +91 9730500506      end_of_the_skype_highlighting .

' सीधी बात '  में  गृहराज्य मंत्री जी के साक्षात्कार के हेतू अधिकृत सूत्रधार 
माननीय श्री राहुल कंवल जी को उनके फेसबुक संदेश बक्से के माध्यम से 
ई-मेल की प्रतिलिपी सहित निम्न लिखित अंग्रेजी में पत्र भेजा गया है ।

--: श्री राहुल कंवल जी को अंग्रेजी भाषा में लिखे पत्र की प्रतिलिपी :--

04 / 02 / 2013.

SHRI RAHUL KANWAL Ji,  NAMASKAR.

                                                                                                          I AM HAPPY TO SEE THE INTERVIEW ON 
3rd FEB,2013. IN RESPECT TO RESPECTED STATE MINISTER FOR HOME AFFAIRS SHRI
R. P. N. SINGH SAHEB, ON AAJ TAK 'Sidhi Baat' UNDER YOUR BEST ANCHORSHIP. 
            IN THIS REGARD I H'VE BEEN REQUESTED & SUGGESTED A FEW LINES TO THE 
HON'BLE MINISTER.  THE SAME HAS BEEN  DELIVERED HIM THROUGH A  E-MAIL.

           SIR, THE COPY OF THIS E-MAIL IS GIVEN ABOVE  WITH CONFIDENCE 
THAT YOU WILL COOPERATE ME AT YOUR LEVEL TO AVOID VIOLATION OF RTI ACT 
COLUMN 4. I SHALL BE THANKFULTO YOU AS THE TRANSPARENCY WILL COME OUT 
AT ALL THE OFFICES DUE TO SHARE OF YOUR HARD EFFORDS FOR THE STOPAGE OF 
UNDUE ALLEGATIONS RESULTING PEACE IN THE COUNTRY AS STATED IN THE E-MAIL.
Thank you Sir, Best Wishes.
With warm regards

CHANDRAKANT VAJPEYI. Sr.Citizen & Social Worker. Aurangabad.


Friday, 14 December 2012

स्वयं और म.प्र. सरकार को दागदार होने से बचाने के लिये प्रस्ताव बनाकर शासन की ओर भेजने विषयक।


स्वयं और म.प्र. सरकार को दागदार होने से बचाने के लिये प्रस्ताव बनाकर शासन की ओर भेजने विषयक। Inbox x
Inbox
x

Chandrakant Vajpeyi <chandrakantvjp@gmail.com>
4:34 PM (12 hours ago)
to dprwebmp, PP, nk_sune, nk_sune

14 -12 - 2012.

स्वयं और म.प्र. सरकार को दागदार होने से बचाने के लिये प्रस्ताव बनाकर शासन की ओर भेजने विषयक।
 
Inbox
x

Chandrakant Vajpeyi <chandrakantvjp@gmail.com>
8:05 PM (2 minutes ago)
  
to cm, cs, dmgwalior, cmonepanagar, prabhat.rs, prabhatjhabjp, bjpmp, PP
  
दिनांक  :-  ११ / १२ / २०१२.
प्रेषक :-  चंद्रकांत वाजपेयी { जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता } औरंगाबाद. 
[  पूर्व निवासी मध्यप्रदेश ]
             Email :-- chandrakantvjp@gmail.com Mob. :--                          +91 9730500506            .

प्रतिष्ठा में ,
(१)  आदरणीय श्री शिवराज सिंह चौहान साहाब, मुख्यमंत्री म.प्र. शासन।
(२)  माननीय श्री प्रभात झा साहाब, राज्यसभा सदस्य  एवं  अध्यक्ष भा.ज.पा.  म.प्र. ।
(३)  माननीय  मुख्य सचिव महोदय,  मध्यप्रदेश शासन, भोपाल, म.प्र. ।
(४)  माननीय समस्त जिलाधिकारी महोदय, मध्यप्रदेश ।
(५)  माननीय कार्यपालन अधिकारी न.पा. नेपानगर ।
(६)  समस्त विभागीय कार्यपालन अधिकारी महोदय, म.प्र. शासन ।

सभी आदरणीय महानुभाव,
म. प्र. में सार्वजनिक हित के किये गये उत्तम कार्य के लिये 
"  सभी  महानुभावो का   हार्दिक अभिनंदन  "


म.प्र. के लिये यह अभिमानास्पद है कि माननीय मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में 
राज्य नें एक ओर अत्यंत तीव्र गती से असीमित प्रगती की है, लेकिन दुसरी ओर 
समाचार पत्रो और सूचना माध्यमो के अनुसार प्रदेश में हर स्तर पर 
आर्थिक भ्रष्ट्राचार के अनेक प्रकरण पंजीकृत हुवे है ।  अनेक अपराध सिद्ध हुवे है ।
 देशभर के आर्थिक अपराध संख्यानुसार म.प्र. का स्थान पिछडी श्रेणी में नही है ।

म.प्र. सहित देशभर में कर्करोग की तऱ्ह उपजी 'भ्रष्ट्राचार समस्या' के निदान के लिये 
एक बार फिर से निम्नांकित लिंक खोलकर निदान का वाचन करे और सभी माननीय  
अधिकारी अपने कार्यालय से प्रस्ताव बनाकर शासन की ओर भेजने का कर्तव्य करे ।

भ्रष्ट्राचार के अनर्गल आरोप से स्वयं बचे और सरकार को दागदार होने से बचाने के लिये
निम्न लिंक मे की गयी मांग के अनुसार ६ माह के अंदर व्यवस्था बनावे ।
प्रस्ताव भेजने की जानकारी सार्वजनिक करे, जिससे आपकी प्रामाणिकता सिद्ध होगी।

--: ट्विटर - लिंक - ब्लॉग निम्नानुसार है :--
कृपया निम्नांकित का वाचन  अनिवार्यत: करके  तुरंत योग्य कार्यवाही करे।

REQUEST AN URGENT ACTION, Ref: Emails,Twits, & Hard copies in your office- july 2012.http://chandrakantvjp.blogspot.com/2012/12/request-for-urgent-action-if-related-to.html?spref=tw … … …

धन्यवाद.
शुभकामनाओ सहित,

चंद्रकांत वाजपेयी. [ जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता  ]
औरंगाबाद.  { म हा रा ष्ट्र  }

Tuesday, 11 December 2012

REQUEST FOR AN URGENT ACTION IF RELATED TO YOUR GOOD OFFICE.


‎11 / 12 / 2012.
प्रतिष्ठा में,
आदरणीय
म.प्र. के सभी जिलाधिकारी,

सुचानार्थ   :--  आदरणीय मुख्यमंत्री जी  /  मुख्य सचिव महोदय,
                          म. प्र.  शासन,  भोपाल  [ मध्यप्रदेश ]

Sub :-- REQUEST FOR AN URGENT ACTION IF RELATED  TO YOUR  GOOD OFFICE.

Ref :--  Plz refer to Emails, Twits, & Hard copies deposited in your good  office during july 2012.

मान्यवर सस्नेह शुभाशीष।
                                 जेष्ठ नागरिक के दायित्व और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर इस अपेक्षा सहित आग्रह करता हूँ कि " यदि किन्ही अपरिहार्य कारणों से आपके कार्यालय में निम्न पद्धति से जुडा कोई प्रकरण उच्चाधिकारी के पास प्रस्तावित करना अथवा अग्रेषित करना अभिशेष रह गया हो तो आप स्मरण पूर्वक अपनें कर्त्तव्य को पूर्ण करेंगे तथा प्रकरण प्रस्तोता को कार्यवाही की प्रगति व उसके सन्दर्भ की जानकारी से अवगत कराकर एक सच्चे 'आयएएस अधिकारी ' की भूमिका को प्रस्तुत करेंगे। 

माननीय जिलाधिकारी जी, 
                                 उपरोक्त उल्लेखानुसार कुछ अधिकारियों को पूर्व में प्रेषित पत्र का सारांश   और  वस्तुस्थिति नीचे दी गयी है,  कृपया उसे गंभीरता से पढ़ें और यदि आपका ऐसा कोई सम्बन्ध  हो तो यथावश्यकता  तत्काल   योग्य कार्यवाही करें।

पूर्व प्रेषित पत्र का सारांश / वस्तुस्थिति :--

11 / 15 जुलाई 2012. से आज तक म.प्र. के माननीय मुख्यमंत्री जी सहित म.प्र.के अनेक अधिकारियों व राजनेताओं को " भ्रष्ट्राचार व आर्थिक अपराध के आरोपों से मुक्ति कैसे होगी व इस सम्बन्ध में आर्थिक पारदर्शिता कैसे आ सकेगी "  इस बाबद अनेक व्यक्तिगत पत्र,  ईमेल, ट्विटर, सोशल मीडिया, फेसबुक इत्यादि माध्यमों से भेजे गए।
जिलाधिकारी जी, यह अत्यंत दु:ख  का और शर्म का विषय है कि किसी का कोई जवाब नहीं, क्यों ? आखिर मुख्यमंत्री जी, मुख्य सचिव जवाब क्यों नहीं देते ?  राजनेता मुंह क्यों नहीं खोलते ?  कलेक्टर - कार्यपालक अधिकारी भी उपरोक्त आवश्यकता का कोई प्रस्ताव ना तो उच्चाधिकारियों को भेजते है और नाही इस विषय के प्रस्तोता को कोई उत्तर भेजते है ।
आखिर क्या कारण है ? " क्या निम्न व्यवस्था गलत है ?

क्या सारे देश के साथ म.प्र. भ्रष्ट्राचारमुक्त हो और प्रदेश देश का पथ प्रदर्शक राज्य बनें इसके लिए सुझाव देना गलत है ? "
  किस कारण उत्तर नहीं मिलता ?"
विगत डेढ़ वर्ष पूर्व अर्थात १९ जून २०११ को केंद्र सरकार को  ई-मेल द्वारा और ११ जुलाई २०१२ से आज तक अनेक बार म.प्र. सरकार को निम्न सुझाव के साथ देश व प्रदेशहित में मांग की गयी  थी कि :---

" भारत में प्रगति और शान्ति बनाए रखनें के लिए भ्रष्ट्राचारमुक्ति आवश्यक है ", अत: ६ महीने के अन्दर प्रत्येक सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालय / उद्योग - व्यवसायिक प्रतिष्ठान को ' ई-कैश्बुक से जुडी वेबसाईट बनाना, इस वेबसाईट का संचालन प्रतिदिन करके हर दिन आय-व्यय के ब्योरे का वेबसाईट पर रेखांकन सुनिश्चित करना हर हाल में अनिवार्य और बंधनकारी करें ' | इसके अलावा हर प्रकार के आदेश - निर्देश उक्त वेब साईट पर लोड करना और ५०/- या १००/- रुपये से अधिक के भुगतान हेतु केवल प्लास्टिक मनी के उपयोग की बाध्यता उक्त कार्यालय / उद्योग-व्यवसाय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्यलेखाधिकारी तथा निदेशक के लिए बंधनकारी हो | " इस व्यवस्था के अभाव में ६ महीनें के बाद सम्बंधित व्यक्ति, उद्योग-व्यवसाय आदि के लायसेंस, मान्यताएं, स्वीकृतिया रद्द किये जावे और पानी-बिजली के वितरण तब तक बंद कर दिए जाए जब तक सम्बंधित व्यक्ति, उद्योग-व्यवसाय उपरोक्त लिखित व्यवस्था का पालन नहीं करेंगे।"

निश्चित ही इस कठोर व्यवस्था से "भ्रष्ट्राचारमुक्त भारत की स्थापना के मार्ग प्रशस्त होंगे" जिससे सरकारी व गैरसरकारी अधिकारीयों - कर्मचारियों के साथ साथ किसी भी "राजनेता और उद्योग-व्यवसाय से सम्बद्ध व्यक्तियों की छबि भविष्य में धूमिल नही होगी" मिथ्या आर्थिक अपराध या घोटालों के आरोप नहीं लग सकेंगे और देश में शान्ति व तीव्र प्रगति की स्थापना होगी ।
आदरणीय जिलाधिकारी जी, कृपया उक्त राष्ट्रहित का कर्त्तव्य करनें में प्रामाणिकता के साथ कदम बढाएं और सारे देश / म. प्र. राज्य को यह उपहार देकर सम्मान और आशीर्वाद प्राप्त करें, 
यही शुभेच्छाएं । 
___________________ शुभेच्छु ___________________
चंद्रकांत वाजपेयी. जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता.औ.बाद.
ई-मेल: chandrakantvjp@gmail.com +९१९७३०५००५०६.

Thursday, 18 October 2012

टीव्ही चैनल्स किसे दे प्राथमिकता, 'पोलखोल' या 'आर्थिक पारदर्शिता' ?


१९ / १० / २०१२.
क्या यही है भारत के टीव्ही समाचार चैनलो पर प्रतिदिन चल रहे "पोलखोल कार्यक्रम"  की प्रक्रिया ?

आजकल भारत में सभी टीव्ही समाचार चैनलो पर प्रतिदिन "पोलखोल कार्यक्रम" प्रसारित हो रहे है ।  " इस कार्यक्रम मे रोज नये - नये किसी सुविख्यात राजनीतिक नामधारी या किसी सरकार द्वारा किये गये अवैधानिक  व आर्थिक अपराधो के संशय भरे कामो की जानकारी दी जाती है।  यह जानकारी किसी चिरपरिचित अथवा नवीन ' स्वघोषित पाकसाफ व्यक्तित्व के धनी द्वारा दी जाती है '। ये धनी उक्त नामधारी या राजनीतिक  दल के चरित्र अथवा कार्यप्रणाली पर कालिमा लगने वाले दृश्य - श्रव्य सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन गवाहो के साथ करते है ।  
चैनल के कार्यक्रम में अल्प विराम आता है और फिर बात आगे बढती है। "पोलखोल"  कार्यक्रम के द्वितीय चरण में  " आरोपित व्यक्ति व उसके समर्थको द्वारा आरोपो का खंडन किया जाता है।  चैनल के माध्यम से प्रत्यारोप किये जाते है,  पत्रकारो के जवाब दिये जाते है, भारी रोष पैदा होता है और उत्तेजना फैलती या फैलायी जाती प्रतीत है। "   कार्यक्रम के तिसरे चरण में  उक्त पैदा हुवे तनाव और उत्तेजना के स्वरूप का आकलन करके सभी चैनलवाले आरोप-प्रत्यारोप से संबंधित कोई एक सवाल जनता से पूछते है और उस पर कुछ आपस में  वक्ता बहस करते है। कार्यक्रम के अंत में प्रश्न के समर्थन में  जनता की राय का प्रतिशत बताकर जनता की भावनाओ को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया जाता है ।
क्या टीव्ही समाचार चैनल्स 
पोलखोल के बजाय 
६ प्रश्नो पर बहस और सर्वे कराकर देशवासियो को आर्थिक पारदर्शिता के लिये प्रेरित करेंगे ?

बहस और सर्वेक्षण के लिये ६ प्रश्न :--
(१)  क्या समाचार चैनलो के "पोलखोल" कार्यकमो से जागरूकता आ रही 
      है ? 
(२) क्या " पोलखोल " कार्याक्रमो से देश के राजनीतिज्ञ और जनता  
     सहित व्यक्तिगत दुश्मनी का नवीन वातावरण स्थापित हो रहा है  ?
(३) क्या "पोलखोल" कार्यक्रम देश की प्रगती हेतु 'आवश्यक गती' में  
      बाधक हो सकता है ?
(४) क्या प्रतिदिन इस प्रकार के कार्याक्रमो से विश्वसनियता बढेगी या 
      घटेगी ?  
(५) क्या "पोलखोल कार्यक्रम के बजाय टीव्ही चैनलो नें  भारत में  
      "आर्थिक पारदर्शिता" विषयक कार्यक्रम और आंदोलनो को महत्व 
      देना चाहिये ?
(६)क्या भारतमें भ्रष्टाचारमुक्ती या आर्थिक पारदर्शिता की स्थापना के  
      लिये निम्नलिखित  उपाय सार्थक होगा ? 
  ---:भ्रष्टाचारमुक्ती या आर्थिक पारदर्शिता का उपाय:---
" भारत से छह लाख रुपये या इससे अधिक वार्षिक आमदनी करने वाले प्रत्येक भारतीय या विदेशी नागरिक और संस्था या कार्यालय को आगामी ६ महिनो में उसकी अपनी ई-कैशबुकयुक्त वेबसाईट की स्थापना करना और इसका प्रतिदिन संचालन अनिवार्य तथा बंधनकारी करना चाहिये तथा इसके परिपालन के अभाव में संबंधित व्यक्ति या संस्था के विद्युत /पानी वितरण, लायसंस, मान्यताए आदी तब तक निरस्त कर देना चाहिये जब तक उपरोक्त व्यवस्थाये लागू  नही की जावेंगी। इन्हे १०००/- से ज्यादा राशी के आर्थिक व्यवहार के लिये ई-बँकिंग और प्लास्टिकमनी के उपयोग का बंधन करना चाहिये तथा इसके उल्लंघन पर कठोरतम सजा का प्रावधान होना चाहिये।"
कृपया पाठक और टीव्ही दर्शक अपनी राय 
इस ईमेल आयडी पर भेजे, अग्रिम आभार.


Tuesday, 2 October 2012

"क्या सरकार बापू का सच्चे मन से आदर करेगी ?"


०२ - १० - २०१२.  



"क्या सरकार बापू  का सच्चे मन से आदर करेगी ?" 

                   


                                    यदि सरकार  श्रद्धेय  महात्मा  गांधीजी 

 का सच्चे  मन  से  आदर करती है और इस कारण सूचना प्रसारण 

विभाग द्वारा यह इश्तिहार जारी करते हुवे " २ अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय 

अहिंसा दिवस " को सार्थक बनाना चाहती है, तो भारत सरकार को 

सबसे पहले बापू के कहेनुसार सभी नागरिकों के मध्य मित्र- भाव 

स्थापित कराने की आवश्यक पहल करनी चाहिए। इसके लिए 

सरकारी व्यवस्थाओंमें प्रचलित जात, धर्म और आरक्षण को बंद 

करके केवल "भारतीयत्व" की स्थापना करना चाहिए।

                "आज जीव सुनिश्चिती कार्य से लेकर उसकी मृत्यु 

तक हर क्षेत्र में उपरोक्त तीन स्थापनाए लागू है जो " वर्ग-संघर्ष और 

सता-संघर्ष " को  प्रोत्साहन देते हुवे मित्रभाव में न्यूनता पैदा कर 

रही है, जिस कारण हिंसा वृद्धि होकर महात्मा जी के अहिंसा के 

विचारों की धज्जिया उड़ती है।  

                        क्या  सरकार  नागरिकों  के  मध्य  बापू  के 

 मित्र -  भाव  या  एक परिवार भाव की स्थापना का कार्य करके 

सामाजिक समरसता उपरोक्तानुसार निर्मित करेगी और बापू को 

सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करेगी ?



.... चंद्रकांत वाजपेयी. { जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक काआर्याकार्ता } औरंगाबाद.

chandrakantvjp@gmail.com   +91 9730500506 begin_of_the_skype_highlighting            +91 9730500506      end_of_the_skype_highlighting