Saturday, 7 March 2015

तत्काल, आज विद्युत गति से 'महिला दिवस पर मानव संसाधन मंत्रालय अपना संकल्प घोषित करे' "महिला उत्पीडन रोकनें हेतू छात्रो को "मन पर नियंत्रण की शिक्षा"

तत्काल, आज विद्युत गति से
 महिला दिवस पर मानव संसाधन मंत्रालय
 अपना संकल्प घोषित करे.
"महिला उत्पीडन रोकनें हेतू छात्रो को "मन पर नियंत्रण की शिक्षा"
(इस व्यवस्था की स्थापना का निवेदन  |  औरंगाबाद [महा.] से मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी को ई-मेल )







Chandrakant Vajpeyi chandrakantvjp@gmail.com

3:39 AM (6 hours ago)
to SmritihrdministrySudhir, bcc: me
08 / 03 / 2015
प्रेषक :  चंद्रकांत वाजपेयी.  जेष्ठ नागरिक.  
गैरराजकारणी सामाजिक कार्यकर्ता, औरंगाबाद. ( महाराष्ट्र )
प्रोत्साहक : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समावेशित भ्रष्टाचार-अपराध निर्मूलन व विश्वगुरू भारत निर्माण जनआंदोलन ।
एल 1/5, कासलीवाल विश्व,  उल्कानगरी, गारखेडा, औरंगाबाद ( महाराष्ट्र ) ई-मेल :chandrakantvjp@gmail.com

ष्रतिष्ठा में,

(1) सम्मानीय स्मृती इरानी जी,
मंत्री, भारत सरकार, 
मानव संसाधन विकास मंत्रालय,
नई दिल्ली.
(2) मा.  मुख्य सचिव महोदय,
मानव संसाधन विकास मंत्रालय,
नई दिल्ली.

  
विषय :  देशभर में  'महिला उत्पीडन एवं अपराध रोकने हेतु'  " छात्रों को मन पर नियंत्रण की शिक्षा "  सरकार देगी   |

आज महिला दिवस के अवसर पर मानव संसाधन मंत्री  मा. स्मृति ईरानी जी, यह घोषित करें  |

परम आदरणीय मंत्री जी, 
एवं  मा. मुख्य सचिव  महोदय जी, 

 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मातृशक्ति का स्वागत एवं  विनम्र नमन 
 नारी  सुरक्षा व सम्मान का मेरा सादर वचन  


           यह सुस्पष्ट है की देश में व्याप्त असीमितअपराधों का मूल कारण  मनुष्य के मन में  धन व सत्ता का लोभ, स्वार्थ, अनीतिपूर्ण कार्य के प्रति निर्भीकता  और  वासना के दुर्गुणों का उद्भव है  |  जब तक मनुष्य स्वयं ही इन दुर्गुणों पर नियंत्रण करनें की प्रवृत्ति तथा नियंत्रण करनें की क्षमता को प्राप्त नहीं करेगा, तब तक  नारी असुरक्षा - नारी उत्पीडन सहित अनेकानेक प्रकार के असंख्य अपराध होते रहेंगें जो मनुष्य को कष्ट व पीड़ा देते रहेंगे |  यह स्मरण रहे कि  " किसी भी अपराधजन्य  और  कष्ट - पीड़ा उपजानेवाले समाज को शिक्षित समाज   या  सुसभ्य समाज  नहीं कहा जा सकता है  | "   मनुष्य का दृढ़ मनोबल ही इस बिकट समस्या से निजात दे सकेगा, जिसकी स्थापना मात्र  संस्कारक्षम्य शिक्षा से हो सकेगी  |
              शिक्षा देश और समाज की प्रगति तथा संरक्षण मात्र के लिए दी जाती है  | शिक्षा मनुष्य की विकृत मानसिकता व दुष्प्रवृत्ति रोकने के लिए दी जाती है  |  अतएव जब भारत की नारी असुरक्षित व  उत्पीडित रहेगी, अपराध होते रहेंगे, समाज में  कष्ट व पीड़ा का उद्भव होता रहेगा तब तक देश में  शिक्षा दी जाती है, यह कहना पूर्ण उचित नहीं होगा  |
उपरोक्त कारणों से  देशहित में मानव विकास मंत्रालय की मंत्री आदरणीया स्मृति इरानी जी  एवं  उनके मंत्रालय के माननीय मुख्य सचिव महोदय से विनम्र आग्रह है कि" आज  ८ मार्च  २०१५ को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवसके अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक विशेष संकल्प घोषित करे  |

संकल्प में कहा जाए कि   देशभर में महिलाओं की छेडछाड, बलात्कार, उत्पीडन   एवं  अपराधों को रोंकनें के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय  छात्रों को न पर नियंत्रण की शिक्षा "प्रदान करना आवश्यक मानता है  जिससे सुसभ्य समाज की निर्मिति हो |   अतएव आज दि.  ८ मार्च  २०१५ को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय अपना संकल्प व्यक्त करता है कि  यह मंत्रालय देश में शीघ्र  मन पर नियंत्रण की शिक्षा के पाठ्यक्रम की निर्मिति करकेआगामी शिक्षा सत्र २०१६-१७ से  देश के सभी विद्यालयों में उक्त पाठ्यक्रम का संचालन कराएगा | " 

मनुष्य के मन पर नियंत्रण करने के व्यावहारिक पाठ के साथ साथ इसके सैद्धांतिक ज्ञान के पाठयक्रम की निर्मिती और उसे शालाओं व महाविद्यालयों में संचालित किये जाने की आवश्यकता केवल अपने देश को ही नही बल्कि सारी दुनिया में है ।  मन पर नियंत्रण  करनें के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग से  कुछ  नव उपकरणों  व  तंत्र  का विकास करना भी उपयुक्त होगा ।

मान्यवर,
देश में दैनिक रूप से रेप (बलात्कार) की अनेक सूचनाएं व महिला उत्पीडन की असीमित घटनाएं प्रकाश में आ रही है,  जिस कारण राष्ट्रीय  व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्याप्त होकर इस विषय में सर्वत्र चिंतन व परिचर्चाओ के खूब दौर चल रहे है |  चारों तरफ नारी असुरक्षा दिखाई देनें के कारण नागरिकों का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच रहा है, जो स्वाभाविक है |  पुलिस-सैनिक बल प्रयोग से इसका नियंत्रण अस्थायी  और  अधिक खर्चीला अनुभव में आता है |

 मध्यप्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री राज चड्ढा, ग्वालियर,  नें उपरोक्त विषय में फेसबुक पर जो अभिव्यक्ति की है,  निश्चित ही वह पाठ्यक्रम निर्माण के विषय बिंदु में एक विचारणीय बिंदु है जो निम्नानुसार है :--
बलात्कार के लिए स्त्रियों की वेशभूषा या उनके सड़क पर निकलने के समय को दोषी ठहराने वाले वस्तुतः मानसिक रोगी ही हैं, अन्यथा इस देश में तीन साल की बच्चियां या बुरकाधारी स्त्रियां बलात्कार की शिकार कभी न होतीं |

               उपरोक्त महत्वपूर्ण विषय में विनम्रता व स्नेह के साथ अवगत किया जाता है कि मंत्रालय की ओर से अधिकृत पत्राचार होनें की स्थिति में मै यथावश्यकता'पाठ्यक्रम निर्माण एवं  संचालन' के  मुद्दे, वार्षिक कार्यक्रम तथा व्यवस्था बाबत मेरी दृष्टी विस्तार से प्रेषित करके सकारात्मक नि:स्वार्थ सहयोग देनें का प्रयत्न करूँगा |
विश्वास है कि मेरे उपरोक्त निवेदन को स्वीकार करके   आज महिला दिवस के प्रासंगिक दिन, निवेदित संकल्प घोषित किया जाएगा,और आपके कार्यालय से योग्य अधिकृत पत्राचार किया जाएगा, जिसके लिए मै मान्यवर का आभारी रहूंगा |

धन्यवाद |   
शुभकामनाओं सहित,

चंद्रकांत वाजपेयी.  
जेष्ठ नागरिक एवं गैरराजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता.
औरंगाबाद [ महाराष्ट्र ]  पिन :--   431001 

Saturday, 27 December 2014

क्यों और क्या है, जनलोकपाल या लोकपाल ?? आज उसकी याद क्यों ??



क्यों और क्या है,   जनलोकपाल  या  लोकपाल
  ??

आज  उसकी  याद  क्यों  ??
                         क्यों और क्या है " जनलोकपाल या लोकपाल " ??
आईये, राजनीतिक गलियारों से बाहर निकलकर, विशुद्ध सामान्य नागरिक के नातें इसे एकबार समझनें व याद करनें की कोशिश करें | 

" लोकपाल, लोकपाल. लोकपाल " ये शब्द मात्र करोडो लोगोंनें अनेकों बार सुनें ही नहीं, बल्कि वे स्वयं अपनें प्रिय भारत देश में लोकपाल लागू करनें के लिए मा.अन्ना हजारे जी के नेतृत्व में निर्भीक होकर सडकों पर उतरे थे | लोकपाल के लिए देशभर में पूर्णत: अहिंसक ऐतिहासिक सफल आंदोलन हुए और अंतत:18 दिसंबर 2013 को लोकपाल क़ानून स्वीकृत हुआ | 


चार दिन बाद तक यानी 01 जनवरी15, तक लोकपाल की नियुक्ति होंना चाहिए | इस नियुक्ति के लिए विपक्ष के नेता चाहिए जो आज तकनीकी तौर पर उपलब्ध नहीं है, शायद इस कारण सरकार को लोकपाल नियुक्ति में कानूनी बाधा का सामना करना पड रहा है व विलम्ब हो रहा है | 

आईये, प्राथमिक रूप से जनलोकपाल के बारे में जानें " :-- " नीचे बताई बाते प्रस्तावित थी." | पाठको को " लोकपाल " के अभिप्राय की जानकारी मिले इस हेतु नीचे लिंक दी गई है | कृपया आंदोलन किसलिए हुआ था यह जानने के लिए लिंक खोलें और जानें :--http://youtu.be/k93d0op-Zcw 
{ मा. राष्ट्रपति जी द्वारा हस्ताक्षरित लोकपाल --
-- कानून की जानकारी अलग से लेनी होगी }


.......... चंद्रकांत वाजपेयी.
जेष्ठ नागरिक एवं गैरराजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता, औरंगाबाद.
ई-मेल :
 chandrakntvjp@gmail.com 

Monday, 22 December 2014

' देशभक्ति ' क्या होती है ???

२२ / १२ / २०१२.
--------  ' देशभक्ति '  क्या होती है ???  --------
[ डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ]


 डॉ. हेडगेवारजी अपने साथियों को कहते थे कि 
"देशभक्ति हमारा विचार नहीं बल्कि व्रत-संकल्प है"

मित्रों सोचिये,  क्या आज इस कथन के अनुसार हरेक का व्यवहार जरुरी नहीं गया है  ? 

शायद कुछ लोग सोचते है कि देशभक्ति का अभिप्राय 
" केवल राजनीतिक माध्यम से देश तथा
नागरिकों की प्रगति के लिए काम करना है,"
 
परन्तु मेरे विचार से यह सोचना गलत है |

" देशभक्ति " शब्द का सही अर्थ राजनीतिक माध्यम से देश और मानव रक्षा व उनके उत्थान का काम करना बिलकुल नहीं है,बल्कि मै मानता हूँ, " वह व्यक्ति जो स्वयं भारत को अपनी माता माने और अपनी ही तरह भारत को माता मानने वाले और उसके लिए आवश्यकतानुसार जान देनें के लिए प्रतिबद्ध हर भारतीय के लिए पद, प्रतिष्ठा, वोटबैंक, धर्म, जाती, सम्प्रदाय, भाषा और प्रांत आदि से ऊपर ऊठकर प्रामाणिकता के साथ पूर्णत: निर्भीक होकर नि:स्वार्थ भाव से काम करे, 'अथवा' किसी श्रम-सेवा का योग्य अधिकृत मूल्य प्राप्त करते हुवे, निर्भिकता से भ्रष्ट्राचारमुक्त रहकर काम करे, जो देश और मानव की रक्षा तथा उत्थान कर सके, उस व्यक्ति की सच्ची देशभक्ति होती है |

प्रिय देशवासियों आईये, आज से सच्चे देशभक्ति को प्रस्तुत करे और अपने व्यवहार से  परम पूज्य डॉ. हेडगेवार जी के कथन पर अमल करते हुवे उनके संकल्प का सम्मान करें |

........... चंद्रकांत वाजपेयी. 
जेष्ठ नागरिक एवं गैरराजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता, औरंगाबाद ( महाराष्ट्र ) 
ई-मेल : chandrakantvjp@gmail.com



Thursday, 18 December 2014

धर्मांतरण चर्चा नको, फक्त राष्ट्र संरक्षण व राष्ट्र प्रगतीसाठी चर्चा श्रेयस्कर.

१८ दिसंबर २०१४.
'' धर्मांतरण चर्चा "

हा विषय मुळात भांडण-तंटे सुरु करून रक्त नासाडीचे 

 बी पेरणारा  व  मानव वितुष्टी वाढविणारा आहे. 






      ज देशाला प्रामुख्याने एकच गरज आहे, ती म्हणजे मानव व

राष्ट्र संरक्षणा चे आणि त्याच्या प्रगतीचे वळण लावणे, त्यां साठी

प्रत्येक 
भारतीयाने झटणे, वेगवेगळे सर्व धर्म एकत्र करून  " फक्त 

एक राष्ट्रीय 
धर्म निर्मिती करणे आणि या राष्ट्रीय धर्माचे बंधनकारक

पालन करण्याचे 
संसदेत कठोर नियम तयार करणे /  "



सांसद मित्रांनो, संसदेत वाद घालण्या पेक्षा वर उल्लेखित

सर्व कांहीं व्यवहारात आले तरच आजचे सर्व भारतीय 
आपल्या पूर्वजांचे वंशज म्हणविले जातील यांत शंका नाही  |



............. चंद्रकांत वाजपेयी . 

जेष्ठ नागरिक आणि गैरराजकीय सामाजिक कार्यकर्ता, औरंगाबाद.

ई-मेल :  chandrakantvjp@gmail.com

Tuesday, 2 December 2014

इंडिया टीवी के शानदार कार्यक्रम " आपकी अदालत " अपनें १२१ वसंत पूर्ण करे, यही हार्दिक मंगल कामनाएं |



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भारत की शान  "इंडिया टीव्ही", सदा ही रचे नया इतिहास जी,
२१ वर्ष हर हफ्ते, मुस्कान बिखेरते,श्री रजत शर्मानें किया प्यार जी 

आपकी अदालतमें नहीं बख्शा कोई 
नेता,अभिनेता या खिलाड़ी जी 
 शुभेच्छा है कि १२१ वर्षों हमेशा सुस्वस्थ रहें श्री रजत शर्मा जी
                                                                                                                                                                                                 
और 
 सदा सदा ही इंडिया टीव्ही के सफलता के दीप जले जी
१२१ वर्ष बाद भी आप की अदालत के कटघरे में फिर खड़े हो,
 "श्री रजत शर्माके सामने लाडले प्रधानमंत्री श्रद्धेय नरेन्द्र मोदी जी"
औरंगाबाद से इतनाही आशीष देते "जेष्ठ नागरिक चंद्रकांत वाजपेयी"जी
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Friday, 28 November 2014

क्या मातृभाषा में शिक्षा पानें से सचमुच अधिक अच्छे परिणाम आयेंगे ? ?


क्या मातृभाषा में शिक्षा पानें से

सचमुच अधिक अच्छे परिणाम आयेंगे
? ?


 · 53 minutes ago VIDEO: माझा विशेष :
इंग्रजी शाळा बंद करून 
मराठी टिकेल ?, पाहा विशेष चर्चा


पूर्व राष्ट्रपति और महानतम वैज्ञानिक श्री एपीजे अब्दुल कलाम साहाब कहते है,
मेरी शिक्षा मातृभाषा में हुई, इसलिए ऊँचा वैज्ञानिक बन सका |

पाठकों आप स्वयं बताइये कि  देश के महानतम वैज्ञानिक और पूर्वराष्ट्रपति आदरणीय एपीजे अब्दुल कलाम सा.के अनुभवोंसे जिन्होंने सीख नही ली, बल्की उनके विचारों के विरुद्ध व्यवस्था बनाकर उनका अपमान किया और देश का नुकसान किया, उन्हें सजा क्यों न दी जाए ?

मेरी शिक्षा मातृभाषा में हुई, इसलिए ऊँचा वैज्ञानिक बन सका
- अब्दुल कलाम


Published: Wednesday, Feb 08,2012, 18:47 IST Source: IBTL
श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, भारत में प्रक्षेपास्त्रों की जो परियोजना चली उसके पितामहः माने जाते है | कलाम जी बोले की उनके अतिरिक्त इस परियोजना में जितने और भी वैज्ञानिक है , उन सभी वैज्ञानिकों की मूल भाषा मलयालम, तमिल, तेलगु, कन्नड़, बांग्ला, हिंदी, मराठी, गुजराती आदि है अर्थात हमारी मातृभाषा में जो वैज्ञानिक पढ़ कर निकले उन्होंने स्वदेशी तकनीकी का विकास किया एवं देश को सम्मान दिलाया |
मा. एपीजे अब्दुल कलाम साहाब के कथन का सारांश :
 
मातृभाषा में कमसे कम प्राथमिक स्तर की शिक्षा लेनें से विद्यार्थी को अधिकतम समझ आती है | ( विषय ज्ञान अपेक्षाकृत ज्यादा परिपक्व होता है जो अविष्करात्मक विचारों को प्रबल करता है | )
मित्रों स्वयं विचार कीजिये कि " क्या भारत की वह सरकारे और वे सभी अंग्रेजभक्त नागरिक जिन्होंने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा के बजाय अन्य भाषा में विशेषत: "अंग्रेजी भाषा में देनें की पैरवी की और इसका अट्टहास करके राष्ट्रभाषा या अन्य स्थानीय / मातृभाषा के प्राथमिक विद्यालयों को बंद करवानें में कोई कसर नहीं छोड़ी क्या वे गलत नहीं थे ?? क्या उन्होंने देश का नुकसान नहीं किया ???
यदि आपका उत्तर हाँ में है, तो आप सचमुच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से प्रस्तुत शिक्षा विषयक विचारों का और मा. कलाम साहाब के अनुभवों का समर्थन करते है | फिर आप भी देश के हित में सरकार को लिखिए और अपने स्वयं के तथा देश के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाइये |
जरुरत समझें तो गलतियों को सुधार दिजिये, 
गलती करनें वालों को आत्म शर्मिंदगी की सजा ही काफी है |
.......... चंद्रकांत वाजपेयी. 
जेष्ठ नागरिक एवं गैरराजनीतिक सामाजिक कारकर्ता, औरंगाबाद.
ई-मेल :  chandrakantvjp@gmail.com
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सरकार से मांग 
शिक्षा का माध्यम मातृभाषा हो.
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Tuesday, 4 November 2014

पंतप्रधान श्री नरेन्द्र मोदी साहेब आणि चुनाव आयोगाने खाली नमूद लोकशिक्षणाची बाजू मांडावी |

Tuesday, 4 November 2014


पंतप्रधान श्री नरेन्द्र मोदी साहेब आणि चुनाव आयोगाने खाली नमूद लोकशिक्षणाची बाजू मांडावी |


रेडियो कार्यक्रम  मन की बात  मधून पंतप्रधान ।
या कार्यक्रमात श्री नरेंद्र मोदी साहेबांनी 
खाली नमूद लोकशिक्षणाची बाजू मांडावी ।

      मि
त्रांनो, आदरणीय पंतप्रधान श्री नरेंद्रभाई मोदी जी, हल्ली रेडियो वरील   मन की बात  या कार्यक्रमातून  देशातल्या सर्व  सामान्य माणसांशी संवाद साधताहेत   ही चांगली  बाब  आहे,अर्थातच  त्यांच्या या व्यवहारामुळे देशात शासनावर संपलेला विश्वास पुन: जागृत होत आहे ।

मला वाटते की पंतप्रधानांनी  आणि  चुनाव आयोगाने  माझ्या द्वारे  महाराष्ट्रातील निवडणुकांपूर्वी केलेली विनंती  घटनेतील उल्लेखा प्रमाणे 
आदर्श उमेदवार कोणास म्हणावे ?हे  रेडियो कार्यक्रम  मन की बात    आणि   इतर माध्यमाच्या  मदतीने सर्व सामान्य   नागरिकांना सोप्या भाषेत समजवावी  आणि  पंतप्रधान साहेबांनी सुरु केलेल्या यां लोकशिक्षणाच्या  स्वागत योग्य व्यवस्थेस प्रबळ करावे ।  याच प्रमाणे चुनाव आयोगाने देखील सातत्याने  यां विषयाची पुरवणी करीत रहावे  ।   या प्रयत्न्नांनी देशभरात श्री मोदी जी सारखेच विवेकशील जनप्रतिनिधी समोर येतील हे विशेष । 
काय वाचक देशाच्या कल्याणासाठी खालील विनंती स्वत: कडून पंतप्रधान श्री मोदिजी यांना करतील ? 
मी विश्वास करतो कि माननीय वाचक खालील विषयाचे समर्थन करीत स्वत: तर्फे मोदी साहेबांना पत्र पाठवतील त्यासाठी मी त्यांचा सदैव आभारी राहीन ।  अग्रिम धन्यवाद ।

………… चंद्रकांत वाजपेयी.

Sunday, 5 October 2014
आदर्श उमेदवार कोणास म्हणावे ? पंतप्रधानांनीच हे मतदारांना समजावून सांगावे |

05 / 10 / 2014.

 आदर्श उमेदवार कोणास म्हणावे ?  
घटनेत  उल्लेख असल्या प्रमाणे पंतप्रधान  श्री  नरेन्द्र  मोदीनी लोकांना हे सांगून आदर्शता आणि प्रामाणिकता दाखवावी  |


                                 हाराष्ट्रातील सर्व मतदाता बंधू - भगिनींनो,
" हे मान्य करावेच लागेल की श्री अण्णा हजारे यांनी आपल्या आंदोलनातून जनतेला, राजनेत्यांना तसेच राजकीय पक्षांना त्यांचे नैतिक, सामाजिक आणि राष्ट्रीय कर्तव्य व अधिकार याची जी कांही शिकवण दिली त्यां शिकवणीचा परिणाम यायला आता सुरुवात झाली आहे | आता राजकीय पक्ष आणि नेते जनते कडून त्यांच्या विचारांची मागणी व मागणीवर योग्य कार्यवाही करू लागले आहेत | "  अण्णांची ही देशाला मोठी देणगीच म्हणावी |
      .                    हे पण मान्य करावे लागेल की देशाचे पंतप्रधान आदरणीय मोदी साहेब, खरोखर देशहितासाठी प्रामाणिकतेने जीवापाड श्रम करताहेत, झटताहेत| श्री नरेंद्र मोदीजी, आदर्श पंतप्रधान पदाचे गुणयुक्त व्यक्तित्व असल्या मुळे केवळ ३-४ महिन्यातील कामावरून भासते आहे की श्री मोदी देशात आदर्श घडविताहेत |
मित्रांनो, वेगवेगळ्या निवडणुकीतील आदर्श उमेदवार कोण ? 
            प्रत्येक नागरिकाने हे देखील समजून घेण्याची आज गरज आहे, कारण की केंद्र सोडून सर्वत्र मोदी नाहीत | नगर पालिका असो किंवा  विधान सभा तेथे  श्री नरेन्द्रभाई मोदी सारखेच  सर्व सेवक -जनप्रतिनिधी हवेत तेव्हाच तेथे अप्रामाणिकता व कर्तव्य विहिनतेचा दोष लागणार नाही |
भारताच्या घटनेत उल्लेख केल्या प्रमाणे खरा आदर्श उमेदवार कोण ??

आदर्श उमेदवाराची व्याख्या आणि त्यांचे सद्गुण व अवगुण "

" श्री मोदी साहेबा कडूनच हे जाणून घेणे सर्वात जास्त उपयोगी राहील असे मला वाटले, म्हणूनच मी त्याना ट्विट करून हे लोकांना समजावून सांगावे अशी विनंती केली आहे  | "
मित्रांनो, आपणांस विनम्र प्रार्थना आहे की आपण देखील श्री मोदी साहेबांना पत्र पाठवावे - विनंती करावी की श्री मोदी जी यांनी वर नमूद केल्या प्रमाणे आवश्यक अधिकृत माहिती सार्वजनिक करावी, व त्याची प्रत मला पोस्ट करावी, मी संबंधित सर्वांचा आभारी राहीन |
................ चंद्रकांत वाजपेयी. 
जेष्ठ नागरिक व गैरराजकीय सामाजिक कार्यकर्ता, औरंगाबाद (महा.)  ई-मेल :-- chandrakantvjp@gmail.com


पंतप्रधान श्री नरेंद्र मोदी यांना माझ्या द्वारे पाठविलेले ट्विट खालील प्रमाणे आहे :--

Chandrakant Vajpeyi

CHANDRAKANT VAJPEYI @chandrakantvjp 1m1 minute ago

@narendramodi लोग आप की मानेंगे,  कृपा करे बताएं,  संविधान में आदर्श जनप्रतिनिधि की व्याख्या व आदर्श उम्मीदवार के सभी सद्गुण व अवगुण क्या है ?
2:29 AM - 5 Oct 2014 · Details Collapse Reply Favorite