Thursday, 18 October 2012

टीव्ही चैनल्स किसे दे प्राथमिकता, 'पोलखोल' या 'आर्थिक पारदर्शिता' ?


१९ / १० / २०१२.
क्या यही है भारत के टीव्ही समाचार चैनलो पर प्रतिदिन चल रहे "पोलखोल कार्यक्रम"  की प्रक्रिया ?

आजकल भारत में सभी टीव्ही समाचार चैनलो पर प्रतिदिन "पोलखोल कार्यक्रम" प्रसारित हो रहे है ।  " इस कार्यक्रम मे रोज नये - नये किसी सुविख्यात राजनीतिक नामधारी या किसी सरकार द्वारा किये गये अवैधानिक  व आर्थिक अपराधो के संशय भरे कामो की जानकारी दी जाती है।  यह जानकारी किसी चिरपरिचित अथवा नवीन ' स्वघोषित पाकसाफ व्यक्तित्व के धनी द्वारा दी जाती है '। ये धनी उक्त नामधारी या राजनीतिक  दल के चरित्र अथवा कार्यप्रणाली पर कालिमा लगने वाले दृश्य - श्रव्य सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन गवाहो के साथ करते है ।  
चैनल के कार्यक्रम में अल्प विराम आता है और फिर बात आगे बढती है। "पोलखोल"  कार्यक्रम के द्वितीय चरण में  " आरोपित व्यक्ति व उसके समर्थको द्वारा आरोपो का खंडन किया जाता है।  चैनल के माध्यम से प्रत्यारोप किये जाते है,  पत्रकारो के जवाब दिये जाते है, भारी रोष पैदा होता है और उत्तेजना फैलती या फैलायी जाती प्रतीत है। "   कार्यक्रम के तिसरे चरण में  उक्त पैदा हुवे तनाव और उत्तेजना के स्वरूप का आकलन करके सभी चैनलवाले आरोप-प्रत्यारोप से संबंधित कोई एक सवाल जनता से पूछते है और उस पर कुछ आपस में  वक्ता बहस करते है। कार्यक्रम के अंत में प्रश्न के समर्थन में  जनता की राय का प्रतिशत बताकर जनता की भावनाओ को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया जाता है ।
क्या टीव्ही समाचार चैनल्स 
पोलखोल के बजाय 
६ प्रश्नो पर बहस और सर्वे कराकर देशवासियो को आर्थिक पारदर्शिता के लिये प्रेरित करेंगे ?

बहस और सर्वेक्षण के लिये ६ प्रश्न :--
(१)  क्या समाचार चैनलो के "पोलखोल" कार्यकमो से जागरूकता आ रही 
      है ? 
(२) क्या " पोलखोल " कार्याक्रमो से देश के राजनीतिज्ञ और जनता  
     सहित व्यक्तिगत दुश्मनी का नवीन वातावरण स्थापित हो रहा है  ?
(३) क्या "पोलखोल" कार्यक्रम देश की प्रगती हेतु 'आवश्यक गती' में  
      बाधक हो सकता है ?
(४) क्या प्रतिदिन इस प्रकार के कार्याक्रमो से विश्वसनियता बढेगी या 
      घटेगी ?  
(५) क्या "पोलखोल कार्यक्रम के बजाय टीव्ही चैनलो नें  भारत में  
      "आर्थिक पारदर्शिता" विषयक कार्यक्रम और आंदोलनो को महत्व 
      देना चाहिये ?
(६)क्या भारतमें भ्रष्टाचारमुक्ती या आर्थिक पारदर्शिता की स्थापना के  
      लिये निम्नलिखित  उपाय सार्थक होगा ? 
  ---:भ्रष्टाचारमुक्ती या आर्थिक पारदर्शिता का उपाय:---
" भारत से छह लाख रुपये या इससे अधिक वार्षिक आमदनी करने वाले प्रत्येक भारतीय या विदेशी नागरिक और संस्था या कार्यालय को आगामी ६ महिनो में उसकी अपनी ई-कैशबुकयुक्त वेबसाईट की स्थापना करना और इसका प्रतिदिन संचालन अनिवार्य तथा बंधनकारी करना चाहिये तथा इसके परिपालन के अभाव में संबंधित व्यक्ति या संस्था के विद्युत /पानी वितरण, लायसंस, मान्यताए आदी तब तक निरस्त कर देना चाहिये जब तक उपरोक्त व्यवस्थाये लागू  नही की जावेंगी। इन्हे १०००/- से ज्यादा राशी के आर्थिक व्यवहार के लिये ई-बँकिंग और प्लास्टिकमनी के उपयोग का बंधन करना चाहिये तथा इसके उल्लंघन पर कठोरतम सजा का प्रावधान होना चाहिये।"
कृपया पाठक और टीव्ही दर्शक अपनी राय 
इस ईमेल आयडी पर भेजे, अग्रिम आभार.


Tuesday, 2 October 2012

"क्या सरकार बापू का सच्चे मन से आदर करेगी ?"


०२ - १० - २०१२.  



"क्या सरकार बापू  का सच्चे मन से आदर करेगी ?

                   


                                    यदि सरकार  श्रद्धेय  महात्मा  गांधीजी 

 का सच्चे  मन  से  आदर करती है और इस कारण सूचना प्रसारण 

विभाग द्वारा यह इश्तिहार जारी करते हुवे " २ अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय 

अहिंसा दिवस " को सार्थक बनाना चाहती है, तो भारत सरकार को 

सबसे पहले बापू के कहेनुसार सभी नागरिकों के मध्य मित्र- भाव 

स्थापित कराने की आवश्यक पहल करनी चाहिए। इसके लिए 

सरकारी व्यवस्थाओंमें प्रचलित जात, धर्म और आरक्षण को बंद 

करके केवल "भारतीयत्व" की स्थापना करना चाहिए।

                "आज जीव सुनिश्चिती कार्य से लेकर उसकी मृत्यु 

तक हर क्षेत्र में उपरोक्त तीन स्थापनाए लागू है जो " वर्ग-संघर्ष और 

सता-संघर्ष " को  प्रोत्साहन देते हुवे मित्रभाव में न्यूनता पैदा कर 

रही है, जिस कारण हिंसा वृद्धि होकर महात्मा जी के अहिंसा के 

विचारों की धज्जिया उड़ती है।  

                        क्या  सरकार  नागरिकों  के  मध्य  बापू  के 

 मित्र -  भाव  या  एक परिवार भाव की स्थापना का कार्य करके 

सामाजिक समरसता उपरोक्तानुसार निर्मित करेगी और बापू को 

सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करेगी ?



.... चंद्रकांत वाजपेयी. { जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक काआर्याकार्ता } औरंगाबाद.

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Wednesday, 29 August 2012

फैसला आपके हाथ, क्या आपको डरपोक रहना है, अथवा ..... ? "



फैसला आपके हाथ, क्या आपको डरपोक रहना है 


अथवा ..... ? "


........... चंद्रकांत वाजपेयी. जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता.



देश के सम्मानीय नागरिकों, हमारे बच्चों के शिक्षा का हक तुड़वाया था  अजमल कसाब के

आतंकवादी हमलों के डरनें, परन्तु यह हक पुन: बहाल करवाया था राष्ट्रनिष्ठ युवा संगठन ' अखिल

भारतीय विद्यार्थी परिषद् नें ।" 

यदि अ.भा.वि.प. ना होता तो कसाब के विरुद्ध कोर्ट में ग्वाही देनेंवाली शूरवीर बालिका 'देविका 

रोटवान' शिक्षा से वंचित रह जाती। ख़ुशी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट, विद्यार्थी परिषद् और बहादुर 

देविका; सबनें अपना - अपना धर्म निभाया है। क्या आप भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध सड़क पर उतरकर 

अपना धर्म निभायेंगे ?


क्या आप ऐसे बहादुर बालिका और देशभक्त अ.भा.वि.प. की तरह निर्भीकता से कार्य करते हुवे 


भारत की समृद्धि और संरक्षण करनेंवाले " यूथ -अगेस्ट करप्शन,  " अण्णा हजारे प्रणित 

''भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन न्यास, '' इंडिया अगेंस्ट करप्शन, " विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

समावेशित भ्रष्टाचारमुक्त भारत निर्माण आन्दोलन, " भारत स्वाभिमान ट्रस्ट एवं बाबा रामदेव के

कालाधन वापस लाओ आन्दोलन आदि का सच्चा साथ नहीं देंगे? क्या आप डरपोक रहकर देश को

भ्रष्टाचार की दीमक लगानें वाले चंद राजनीतिज्ञों का साथ देंगे ? उन्हें वोट देंगे या वोट ना देकर

चोट पहुंचाएंगे ? फैसला आपके हाथ, सोचिये आपको क्या करना है ।


......  चंद्रकांत वाजपेयी, जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता.      

    chandrakantvjp@gmail.com   +919730500506      

Friday, 17 August 2012

क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता ...

 क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता ...
 १६/०८/२०१२.         क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता के लिये अभिनन्दन'  अथवा    'संभावित कुटिलचाल के लिए निर्वासन...

क्या किया जाना उचित होगा ? 'विश्वस्तर पर धनाढ्यता के लिये अभिनन्दन' अथवा 'संभावित कुटिलचाल के लिए निर्वासन'

१६/०८/२०१२.       क्या किया जाना उचित होगा ?

'विश्वस्तर पर धनाढ्यता के लिये अभिनन्दन'
 अथवा 
  'संभावित कुटिलचाल के लिए निर्वासन' 

" हर बेटे की माँ उसकी सच्ची 'रक्षक' और सच्ची 'गुरु' होती है। जब कोई माँ अपनें बेटे को यह सीख दे कि मेरे प्रिय पुत्र "साहस-शौर्य और सुबुद्धि द्वारा राष्ट्रनिर्माण ही तेरा जीवन है, मै मेरा ऐसा बेटा चाहती हूँ जो केवल देश के लिए जिये, तब उस घर में निश्चित ही राष्ट्र निर्माता तैयार होते है."  जीजा माता के इसी व्यवहार के कारण शिवाजी एक शूरवीर इतिहास पुरुष बने. अर्थात पुत्र/पुत्री का भविष्य मां गढ़ती है |
उपरोक्त तथ्य की सत्यता के लिए आज भी विश्व के एक परिवार का जिवंत उदाहरण सबके सामने है। यह वह परिवार है जिसके कुछ पीढ़ीयों से वंशज सत्ता के शीर्ष में रहे है। इस परिवार की एक माता को विश्वस्तरीय धनाढ्यों में माना जा चुका है और इस परिवार का नाम भारत के इतिहास में भी अंकित है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आँख बंद करके और बिना कोई विशेष विचार किये अनेकानेक नागरिक इस परिवार का सही नाम बता देंगे |
मेरा मानना है कि उल्लेखित परिवार की कुछ बहु-बेटियाँ प्रारम्भ में उल्लेखित बातों को अच्छी तरह से समझ चुकी है और उसका पालन करके अपनें निजी उद्देश्य प्राप्ति में सफल रही है। संभवत: उन्होंने सानंद यह स्वीकार कर लिया है कि "वे उनके वंशजों की 'सच्ची रक्षक' और 'सच्ची गुरु' है अत: उन्हें केवल ऐसे पुत्र - पुत्री उनके देश के सामनें प्रस्तुत करना है जिनके हाथों से सदा सत्ता सूत्र संचालित होते रहें या सत्ता उनके हाथों में बनी रहे। साथ ही साथ उन्होंने निजी रूपसे उनका उद्देश्य यह भी मान लिया है कि उनके वंशज स्थायी अनंत संपत्ति के मालिक बनें | इस हेतु वे इसका पालन कुछ विशिष्ट पद्धतिसे
करती रही है।
इस परिवार की कुछ माताए शायद अपनें पुत्र-पुत्री को प्रतिदिन यह शिक्षा देती रही है कि " भविष्य में तू और केवल तू ही तेरे अपनें देश का कर्णधार है। सत्ता सूत्र सदैव अपनें हाथों में रख। तू साम-दाम-दंड-भेद का उपयोग करके संपत्ति का अनगिनत अर्जन कर, निजीतौर पर केवल यही तेरे जीवन का और हमारे परिवार का मूललक्ष है। इस स्थिति की प्राप्ति पर ही तू मेरा पुत्र या पुत्री कहलायेगा अन्यथा नहीं। बोल वचन दे की तू मेरा सच्चा और आज्ञाकारी पुत्र या पुत्री बनना चाहता है या नहीं ? बताया गया लक्ष प्राप्त करना चाहता है या नहीं ? यह याद रख कि " तेरे पूर्वज इसी क्रम में आगे बढे है, क्या तू अपनें पूर्वजों के कदमों पर कदम नहीं रखेगा ? आप ही बताइये कौन अपनी मां को ना करेगा ? उसे तो हाँ कहना ही होगा, उसे लक्ष प्राप्ति का वचन देना ही होगा।    " क्या प्रतिदिन अपनी मां को ऐसा वचन देते हुवे उस व्यक्ति के खून में उक्त भाव व्यवहार में लानें का संकल्प, न समा जाएगा ? "
लक्ष प्राप्त करनें की पक्की सोच बनानें के लिए शायद इस परिवार की कुछ माताएं उनके पुत्र - पुत्रियों को आगे यह भी समझाती होंगी कि " जिस देश में तू रहता है उस देश में तेरे चारों तरफदिखनें वाले, तेरे साथ खेलनें वाले, तेरे साथ पढ़नें वाले या तुझे मदत करनें वाले सभी लोग तेरे सेवक है, इनको कभी अपना भाई या सच्चा मित्र ना समझना और ना कभी ऐसा नाता जोड़ना। तेरे इस देश के लोग बहुत ज्यादा भावुक होनें के साथ - साथ लोभी है, धन या पद के लोभी। इन्हें कुछ थोडे से रुपयों में अथवा कोई छोटा लाभ देकर आराम से खरीदा या बेचा जा सकता है। इनको आपस में लड़वाना भी बहुत सरल है। इसलिए इन्हें कभी आपस में इकट्ठा नहीं होने देना है और इनमें विचारों की साम्यता भी नहीं होनें देना है। इन्हें हमेशा आपस में लड़वाओं और अपना उल्लू सीधा करते हुवे ऊपर बताया गया अपना लक्ष प्राप्त करो। हमेशा यही रणनीति उपयोग में लाना है और कामयाब होना है।
इस देश के लोग मीठे बोल से पिघल जाते है। अत: सबसे पहले मीठा बोलकर उनके साथ दिखावे के लिए दो कदम चलना। ऐसा स्वांग करनें में सफल होना कि तेरे व्यवहार से उन्हें सच्चा लगनें लगे कि केवल उनके कष्ट दूर करनें के लिए तू अपना घरबार-परिवार  छोड़कर उनके पास आया है। कच्चे मकान में एकाद रात रहना और उनके भोजन का आनंद लेनें का स्वांग करनें में सफल होना। तब निश्चित ही वे भावुक होकर तेरे आगे चार कदम चलेंगे, वे तेरी गुलामी करते रहेंगे और इतना ही नहीं वे इमानदारी के साथ तेरे लिए अपनी जान भी जोखिम में डालेंगे।
बस इतना याद रख " तू हर हालत में इस देश के मूल निवासियों को कड़वे बोल नहीं बोलेगा। ऐसा दिखा कि तू उनके लिए नि:स्वार्थ काम कर रहा है, उपकार कर रहा है। " फिर क्या वे सब तुझ पर कुर्बान हो जायेंगे। तेरे कहने पर आँख मूंदकर अपराध करेंगे, धन की लूटपाट अनैतिकता और बाहुबल के मार्ग से करेंगे। इतना ही नहीं वे जेल भी जायेंगे पर तुझे नोट - वोट और सत्ता सब कुछ स्वयं लाकर देंगे। 
यह कहावत सच है कि हर दिन इतवार नहीं होता और लक्ष्मी चंचल होती है ।  इसी तरह इंसान का मन भी स्थिर नहीं होता, वह कभी भी बदल सकता है ।   इसलिए अभी तक प्राप्त नोट - वोट और सत्ता की स्थिति स्थायी भाव नहीं है । या यूँ कहें की तेरे मूललक्ष प्राप्ति का यह अंतिम चरण नहीं है । अंतिम चरण पर पहुँचने के लिए प्राप्त संपत्ति को सुरक्षित रखना होगा और लगातार  पैसे से पैसा बनाना होगा ।  अतएव यथाआवश्यकता धन को विदेशों में गुप्त रूप से भेजना और उसी धन को फिर से तेरे निवास वाले देश की उन्नति के नाम पर कर्ज के रूप में वापस लाना होगा।  मतलब तुम्हारा स्वयंका और तुम्हारे सहयोगियों का अघोषित सारा पैसा ,जिसे "कालाधन " कहते है,  जो तुमनें सहयोगियोके साथ गुप्त रूप से विदेश में  रखा हो , उसी पैसे को ब्याज के आधार पर व्यापार के नाम से  फिर उसी देश में लाना, जिस देश में तुम रहते हो और स्थायी रूप से अनगिनत [अनंत] वैधानिक संपत्ति अर्जित करना ।  
अब आप ही सोचिये और हमें बताइये, 
हम सब देशवासी क्या करे ?
  विश्वस्तर पर धनाढ्यता की कीर्ती हेतू , 
क्या हम सब करे उनका हार्दिक भिनंदन ?
अथवा 
नई पीढी को कुटिलचाल की गलत सीख हेतू , 
क्यो ना करे उनका पदस्थान से निर्वासन ?
________________________________
  ' अब चाहिये जवाब आपका' और 'कर्तव्य देशावासियो का' ।        ________________________________

Friday, 20 July 2012

Recommendations for Economic Transparency in India: " क्या जन-प्रतिनिधि तभी बनेंगे जब वे यह कर दिखाएँग...

Recommendations for Economic Transparency in India: " क्या जन-प्रतिनिधि तभी बनेंगे जब वे यह कर दिखाएँग...: 20/07/2012.  WHY THE 25th JULY & 9th AUGUST 2012 ,  ARE MOST IMPORTANT DAYS TO ALL THE LEADERS  OF INDIA ? "क्या जन-प्रतिनिधि अब तभ...

" क्या जन-प्रतिनिधि तभी बनेंगे जब वे यह कर दिखाएँगे ? "



20/07/2012. 


WHY THE 25th JULY & 9th AUGUST 2012 , ARE MOST


IMPORTANT DAYS TO ALL THE LEADERS OF INDIA ?




"क्या जन-प्रतिनिधि अब तभी बनेंगे जब वे यह कर 
दिखाएँगे?" 




       नेताओं,  याद  रखिये  कि  यदि  " जन लोकपाल  विधेयक  को 


आपका  पूर्ण  समर्थन  नहीं मिलेगा,  अण्णा हजारे के भ्रष्टाचार  विरोधी 


आन्दोलन  /  २५ जुलाई २०१२ को  केंद्र के १५ दागी मंत्रियो व १६२ 


भ्रष्ट-दागी  सांसदों  के  विरुद्ध  जंतर-मंतर  या  आपके  निवास  के 


निकटस्थ  स्थानीय  केंद्र  पर  इस  बाबद  आयोजित  आमरण  भूख 


हड़ताल में आपकी सहभागिता नहीं रहेगी, और बाबा रामदेवजी के ९ 


अगस्त २०१२  के  आन्दोलन  में  आपकी  अनुपस्थिति  या  दूरी पायी 


जायेगी तो फिर  आप  निश्चित  ही  नेता या जन -प्रतिनिधि बननें के 


लायक नहीं है।


जब आप उक्त सब कर दिखाएँगे तभी सब  कहेंगे की आप नेता है और


उम्मीदवारी की प्राथमिक परीक्षा में सफल हुवे है । आप हमारे भी 


नेता है, बशर्ते आप उम्मीदवारी की उपरोक्त प्राथमिक परीक्षा में 


सफल होते है, देश के कानून का उल्लंघन नहीं करते, आपके विरुद्ध 


कोई अपराधिक मुकदमा / ऍफ़आयआर दर्ज नहीं है और भविष्य में 


भी यही स्थिति बनाकर रखेंगे, आप सभी सार्वजनिक हित के कार्यों 


में खुले दिल से सहकार्य करते हैं, आप स्नातक तक पढाई कर चुके 


है, आपकी आयु ६०वर्ष से ज्यादा नही है, आप किसी धर्म, जाती, 


भाषा या प्रांत के प्रति विशेष आसक्त न होकर समभाव रखते है. 


इतना ही नहीं आपअपने स्वयं के और खून के रिश्ते दारो के आर्थिक 


आय-व्यय को हर चार माह में वेब साईट पर सार्वजनिक करनें तथा 


कोई आर्थिक, भावनिक अथवा शारीरिक अपराध घटित नहीं होनें 


देनें के लिए वैधानिक तरीके से वचन बद्ध है तो, आगामी चुनाव में 


आप हमारे उम्मीदवार ही नहीं जन प्रतिनिधि होंगे. 


देश को आपकी ही जरूरत है. इसलिए २५ जुलाई और ९ अगस्त


२०१२ को अपनें प्राणों की बाजी लगाएं - देश के लिए जियें । 




क्या आप देश के लिए जियेंगे ? क्या उपरोक्त कर दिखाएँगे ? 

" आपकी जय हो. जय हिंद. जय भारत. "




राष्ट्रहितार्थ प्रतिबद्ध , 




चंद्रकांत वाजपेयी.  { जेष्ठ नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता. } 




Coordinator : 




 " Movement for Corruptionfree India thru


 Science & Technology" Aurangabad. Maharashtra. 




Mobile  No.  :   +919730500506. 


Email: chandrakantvjp@gmail.com